गधों की सत्ता …!!!

गधों की सत्ता …!!!

घोडों के सरदार, जब गधे हो गए …
सत्ता के आचार, सब तब ढेर हो गए |
चापलूस घोडों का, नगर में राज हो गया …
आम घोडे की “शान” का, यूँ हास हो गया ||

दौड़ के मैदान, “गध-दौड़” के लिए मशहूर हो गए …
एक से एक आला घोडे, सब मजदूर हो गए |
शतरंज की बिसात पर, गधों की चाल हो गई …
कुश्तियां “दुल्लातियों” में तब्दील हो गयीं ||

“हिन्-हिन्” में भी, “ढेंचू” का प्रयोग हो गया …
रेत में लोटना, अब एक योग हो गया |
गधों में भी अस्तबल का रौब हो गया …
चारे में चने का, एक शौक हो गया ||

घोडों का झुंड एक इतिहास हो गया …
“गधों के समाज” से विख्यात हो गया |
गधों का, घोडों पर उपहास हो गया
घोडों को भी गधों पर, जब नाज़ हो गया ..!!!

.                                           – संभव

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A satire on today’s Politics , hope this will be visible.

Do read :-
(i) George Orwell’s “Animal Farm” if you haven’t yet.
(ii) ओम प्रकाश आदित्य की “इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं “

जाते जाते – किसी ने आज के परिपेक्ष में लिखा है
“घोडों को मिलाती नही है घांस यहाँ , गधे खा रहे देखो साग यहाँ”

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18 Responses to “गधों की सत्ता …!!!”

  1. Bharat Says:

    good.. reminds me of kaka kathrasi.

  2. aniket Says:

    अच्छा प्रयास है. कवि सम्मेलनों में कही जाने वाली कविताओं की शैली में लिखा गया. इसको आप ख़ुद मंच पर अपने अंदाज़ में सुना कर वाहवाही लूट सकते हैं.

    एक सुझाव. इतनी अच्छी कविता पर यह शोभा नहीं देता कि उसका अर्थ आप ख़ुद नीचे लिख दें. कविता को मौका दीजिये कि वह ख़ुद अपनी बात कहने लायक है, यह वह साबित कर सके. अर्थात, “कविता बोले, आप नहीं”. हर पढने वाले को कविता की व्याख्या अपने ढंग से करने दीजिये. यदि पढने वाला पूरी इमानदारी से कविता पढ़कर आपके अर्थ से कुछ अलग अर्थ निकालता है, तो यह आपकी कविता की शान होगी. अपना अर्थ पाठक को बताना कवि सम्मलेन में जम सकता है जहाँ पर हर श्रोता को तुंरत मनोरंजन देना उद्देश्य होता है, पर लिखित माध्यम में, जहाँ पर कुछ नया, गहरा चिंतन कराना उद्देश्य हो, वहाँ ऐसा करने से मेरे ख्याल में बचना चाहिए.

    लिखते रहिये. अगली रचना के इंतज़ार में…

  3. Harsh Vardhan Says:

    mast poem hai yaar !!
    wonderful humor !! reminds me of
    “Sri ram chand keh gaye siya se , Aisa kalyug aayega,
    Hans chugega dana tinka , kawa moti khayega”

  4. shrikant Says:

    बहुत खूब संभव साहब, अब जब आप कविता लिखने में इतने माहिर हो गए हैं तो एक उपनाम भी रख लीजिये
    चलिए आपकी मुश्किल हम हल कर देते हैं “तिनका मतवाला” कैसा रहेगा ??
    भाई मानना पड़ेगा बहुत ही अच्छी कविता की है आपने

  5. समीर लाल Says:

    हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

  6. sangita puri Says:

    इस नए चिटठे के साथ चिटठा जगत में आपका स्‍वागत है । बहुत अच्‍छा लिखते हैं आप। आशा है कि आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को मजबूती देकर पाठको का ज्ञानवर्द्धन करेंगे। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है।

  7. अनूप शुक्ल Says:

    लिखते रहें। स्वागत!

  8. mehek Says:

    waah bahut hi satik likha hai,magar kahi sach bhi hai:),shukran hamare blog par aane ke liye.bahut badhai

  9. girishbillore Says:

    wah…!! badhaiyaa
    ek anurodh sattaa ke gadhon pe bhee vichar zarooree hai

  10. शुभम Says:

    शानदार!
    परन्तु अनिकेत ने सही तर्क रखा है, अपनी कविता के मुख्या बिंदु को बतलाये ना, इससे कविता का मज़ा थोडा कम हो जाता है|

    लिखते रहिये!

  11. रचना गौड़ भारती Says:

    गधों को गुलाबजामुन खाने दो।
    हर शाख पे उल्लू बैठा है
    अंजामे गुलिस्तां यही होगा।
    अच्छी रचना ।

  12. pradeep manoria Says:

    aapne gadhe ko hero banakar jo film banaaye hai bahut chalegee kyonki bazar main to rangaa khush jaisee picture bhee chal jatee hai .. joginder hero ho sakta hai to gadha kyon nahee lekin ek bat yaad rakhnaa chahiye ki joginder ko hero lekar joginder ne hee film banaayee thee . aur aap (?) bhi gadhe ko lekar ………

  13. सागर जैन Says:

    बहुत बढ़िया कविता.. पर वास्तव में अब गधे बचे कहाँ? अब तो बेचारे दुर्लभ प्राणियों में शुमार हो गये..
    हाँ यह अलग बात है कि अब ये संसद और विधान सभाओं में बहुतायत पाये जाने लगे हैं।
    ॥दस्तक॥
    गीतों की महफिल
    तकनीकी दस्तक

  14. amit k. sagar Says:

    ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.

    साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.

  15. Dr Anurag Says:

    भाई वाह ….जमे रहिये

  16. mohan vashisth Says:

    अच्‍छी बहुत अच्‍छी बेहतरीन

  17. neha Says:

    bahut badiya sambhav ji…………….


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