मुझे मत पढो … !!!(Don’t Read Me)

दोस्त मुझे लग रहा है की तुम यहाँ गलती से आ गये हो |
 तुम शायद मेरे शीर्षक से वाकिफ नही हो .... जरा गौर
फरमाओ , यह कहता है "मुझे मत पढो" | मुझे लगता है
 तुम जरा चकरा गए हो , पर खैर ... आज के अंग्रेज़ी
परिपेक्ष में ऐसा होना लाजमी है ; तो मैं तुम्हे अंग्रेज़ी में
 समझा देता हूँ -the title says "Don't Read Me..!!".

अरे ! तुम अभी भी पढ़े जा रहे हो ... देखो भाई मैं
 तुम्हे यहीं सचेत कर रहा हूँ की आपना वक्त जाया मत
करो और मुझे पढ़ना यहीं रोक दो | अच्छा अब मैं समझा
... तुम्हे ऐसा प्रतीत हो रहा है की जिस चीज़ के लिए रोका
 जा रहा है इसमे जरूर मेरा कोई लोभ है ... देखो !!
अपनी ये शंका एवं संदेहपूर्ण मानसिकता को त्यागो ... मैं
 तुम्हे कोई ज्ञानवर्धक बात नहीं बताने वाला , अत: मेरी बात
मानो और मुझे पढ़ना यहीं छोड़ दो |

अमा यार !! तुम तो बड़े अड़ियल किस्म  के इंसान हो ,
 अभी भी पढ़ रहे हो ... मैं तुम्हारी भलाई चाह रहा हूँ पर
तुम्हारे कानों पर जूँ तक नही रेंग रही ... इंसानियत के नाते
 बोल रहा हूँ की आदमी का अड़ियल होना अत्यधिक हानिकारक
है ;  यह उसे पतन की ओर अग्रसर करता है , इसलिए मेरी
 बात मान लो |

ढीट !! हाँ हाँ ढीट ... अब मुझे पक्का यकीन हो गया है की
 तुम अड़ियल ही नही अपितु ढीट भी हो   .....
कूदो !...कूदो कूदो ... अब जब तुमने कुँए में कूदने का मन
 बना ही लिया है तो क्या किया जा सकता है आख़िर भैंस के
आगे बीन बजाने का क्या फायदा | अगर तुम में  तिल भर भी
 शर्म बाकी है तो मेरा कहा मान लो |

तुम तो हदद बेशर्म हो !!! ... बेशर्मी की सारी सीमाएं तोड़
 चुके हो और ऐसे अकड़ रहे हो जैसे मेरा कुछ उखाड़ रहे हो
... मेरा कुछ नही जा रहा अलबत्ता तुम ही अपना समय बरबाद
 कर रहे हो | पढो मुझे क्या है !! ... मेरे बाप दादा का क्या
जा रहा है , मुझे पढ़ कर तुम ही अपने  आप को एक बददिमाग
 बेवकूफ साबित करने पर तुले हो |

तो आख़िरकार तुम्हारी खुजली शांत नही हुई .... मेरे मन करने
 पर भी तुमने मुझे पढ़ ही लिया ... और अब शेख चिल्ली की
तरह गर्व महसूस कर रहे हो , मूर्ख !!! ... खैर अब जो भी
 है ! ...बस एक विनती है.. तुम्हे  जो करना था तुमने किया
पर किसी भले मानुष को मुझे पढने के लिए प्रेरित मत करना |

तुम नही सुधारोगे ... मुझे आभास हो रहा है की  तुम्हारा शैतानी
 दिमाग क्या सोच रह है |
बाप रे !  भगवान् बचाए ऐसे लोगों से !!!!

PS : अब ये भी पढोगे क्या !!!!!
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15 Responses to “मुझे मत पढो … !!!(Don’t Read Me)”

  1. piyush Says:

    मैंने उपर्युक्त लेख का पाठन नहीं किया है . और मैं ये भी बोलता हु की ये उस लेख पर कोई टिपण्णी भी नहीं है . जब मैंने लेख पढ़ा ही नहीं तो मैं टिपण्णी कैसे दे सकता हु . वैसे जब ये कोई टिपण्णी है ही नहीं तो इसे यहाँ पर लिखने का मतलब ही क्या बनता है . और चलो मैंने लिख भी दिया तो भी इस संचार प्रोद्योगिकी का स्वामी इसे स्वीकार क्यूँ करेगा . मुझे तो लगता है की इसे पढने व स्वीकार करने वाला बहुत ही बड़ा बेरोजगार निकम्मा व्यक्ति होगा . जिसे दुनिया में और कोई काम नहीं है . वैसे मेरे मस्तिष्क में ये विचार उठ रहा है की अब मुझे विदा लेनी चाहिए वरना इस संचार प्रोद्योगिकी का मालिक मुझ पर प्रवेश निषेध भी लागु कर सकता है .
    वैसे इस टिपण्णी को कोई पढेगा तो नहीं और अगर किसी ने पढ़ी तो वो बहुत ही बड़ा निकम्मा होगा तो उसे शुभ रात्रि बोलने का कोई अर्थ भी नहीं निकलता तो ऐसे ही जाता हु . 😛

  2. Kulbir Saini Says:

    first reaction – theme sucks big time … it shows scrollbars all over the place and i can’t read comfortably …
    second reaction (after reading the post in google reader) – nice start … you did it after almost a year or two … keep up the good work 🙂 welcome abroad 😀

  3. Chand Says:

    dare you read this comment!

  4. Karan Says:

    I’ll read the post later.. Its in Hindi, darn!
    Hell, welcome to the blogroll 🙂 Finally!

  5. Aniket Says:

    शुरुआत के लिए बढ़िया है, पर कुछ बातें खलती रहीं.
    एक तो जो कुलबीर ने कहा वो. पोस्ट के बीच में स्क्रोलबार क्या काम? और दूसरे, भाषा मुझे कुछ कम जमी. नवाबी उर्दू लफ्जों और किताबी तत्सम हिन्दी के एक के बाद एक इस्तेमाल से लगता है कि एक नहीं, कई आदमी बोल रहे हैं. या फिर ये कि एक ही आदमी ज़बान बदल बदल कर बात कर बात कर रहा है. दो अलग अलग ज़बान के इस्तेमाल से जो फ्लो इस तरह की पोस्ट में होना चाहिए था, वो नही बना.
    खैर पहली पोस्ट है. लेखनी में धार ज़रा देर से ही आती है. लिखते रहो. हमारे बैच के नए ब्लॉगर का चिटठा जगत में स्वागत!

  6. Kulbir Saini Says:

    why don’t you just choose a fluid theme???? still scroll bars …. :((

  7. Kulbir Saini Says:

    i love this theme so much .. look exactly like drupal garland theme 😀

  8. Pankaj Saini Says:

    miyaan… jisko jo kahna hai kahne do….. humko to behat pasand aayi……

    @aniket : yeh jo do waqtaaon ka ahsaas hota hai kabhi ‘urdu’ kabhi… ‘desi hindi’ … yehi is post ka nichod hai…

    @kulbir : chache …. bhaavnaoon ko samjho….

    dost…tum lage raho…..shuruaat ke liye 8/10 [:D]

  9. @nks Says:

    reminded me of my very old post … http://theanksden.wordpress.com/2006/05/25/dont-read-this-post/

    though this one’s definitely better

  10. Harsh Bansal Says:

    Well you said not to read … so I didnt read this post …
    but leaving a comment as that was never restricted.

  11. Rewa Smriti Says:

    hmmmm……nahi padhi bus ek nazar dourayi 😉

  12. Kushal Dave Says:

    Nice….
    good … especially that “PS : अब ये भी पढोगे क्या !!!!!” is gem 🙂
    The criticism in the comments i don’t think is right ……
    was a good post.. 🙂

  13. Randeep Says:

    abe nahi padhi poori bhai …..bheech mein hi chhod di


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