गधों की सत्ता …!!!

गधों की सत्ता …!!!

घोडों के सरदार, जब गधे हो गए …
सत्ता के आचार, सब तब ढेर हो गए |
चापलूस घोडों का, नगर में राज हो गया …
आम घोडे की “शान” का, यूँ हास हो गया ||

दौड़ के मैदान, “गध-दौड़” के लिए मशहूर हो गए …
एक से एक आला घोडे, सब मजदूर हो गए |
शतरंज की बिसात पर, गधों की चाल हो गई …
कुश्तियां “दुल्लातियों” में तब्दील हो गयीं ||

“हिन्-हिन्” में भी, “ढेंचू” का प्रयोग हो गया …
रेत में लोटना, अब एक योग हो गया |
गधों में भी अस्तबल का रौब हो गया …
चारे में चने का, एक शौक हो गया ||

घोडों का झुंड एक इतिहास हो गया …
“गधों के समाज” से विख्यात हो गया |
गधों का, घोडों पर उपहास हो गया
घोडों को भी गधों पर, जब नाज़ हो गया ..!!!

.                                           – संभव

==========================

A satire on today’s Politics , hope this will be visible.

Do read :-
(i) George Orwell’s “Animal Farm” if you haven’t yet.
(ii) ओम प्रकाश आदित्य की “इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं “

जाते जाते – किसी ने आज के परिपेक्ष में लिखा है
“घोडों को मिलाती नही है घांस यहाँ , गधे खा रहे देखो साग यहाँ”

मुझे मत पढो … !!!(Don’t Read Me)

दोस्त मुझे लग रहा है की तुम यहाँ गलती से आ गये हो |
 तुम शायद मेरे शीर्षक से वाकिफ नही हो .... जरा गौर
फरमाओ , यह कहता है "मुझे मत पढो" | मुझे लगता है
 तुम जरा चकरा गए हो , पर खैर ... आज के अंग्रेज़ी
परिपेक्ष में ऐसा होना लाजमी है ; तो मैं तुम्हे अंग्रेज़ी में
 समझा देता हूँ -the title says "Don't Read Me..!!".

अरे ! तुम अभी भी पढ़े जा रहे हो ... देखो भाई मैं
 तुम्हे यहीं सचेत कर रहा हूँ की आपना वक्त जाया मत
करो और मुझे पढ़ना यहीं रोक दो | अच्छा अब मैं समझा
... तुम्हे ऐसा प्रतीत हो रहा है की जिस चीज़ के लिए रोका
 जा रहा है इसमे जरूर मेरा कोई लोभ है ... देखो !!
अपनी ये शंका एवं संदेहपूर्ण मानसिकता को त्यागो ... मैं
 तुम्हे कोई ज्ञानवर्धक बात नहीं बताने वाला , अत: मेरी बात
मानो और मुझे पढ़ना यहीं छोड़ दो |

अमा यार !! तुम तो बड़े अड़ियल किस्म  के इंसान हो ,
 अभी भी पढ़ रहे हो ... मैं तुम्हारी भलाई चाह रहा हूँ पर
तुम्हारे कानों पर जूँ तक नही रेंग रही ... इंसानियत के नाते
 बोल रहा हूँ की आदमी का अड़ियल होना अत्यधिक हानिकारक
है ;  यह उसे पतन की ओर अग्रसर करता है , इसलिए मेरी
 बात मान लो |

ढीट !! हाँ हाँ ढीट ... अब मुझे पक्का यकीन हो गया है की
 तुम अड़ियल ही नही अपितु ढीट भी हो   .....
कूदो !...कूदो कूदो ... अब जब तुमने कुँए में कूदने का मन
 बना ही लिया है तो क्या किया जा सकता है आख़िर भैंस के
आगे बीन बजाने का क्या फायदा | अगर तुम में  तिल भर भी
 शर्म बाकी है तो मेरा कहा मान लो |

तुम तो हदद बेशर्म हो !!! ... बेशर्मी की सारी सीमाएं तोड़
 चुके हो और ऐसे अकड़ रहे हो जैसे मेरा कुछ उखाड़ रहे हो
... मेरा कुछ नही जा रहा अलबत्ता तुम ही अपना समय बरबाद
 कर रहे हो | पढो मुझे क्या है !! ... मेरे बाप दादा का क्या
जा रहा है , मुझे पढ़ कर तुम ही अपने  आप को एक बददिमाग
 बेवकूफ साबित करने पर तुले हो |

तो आख़िरकार तुम्हारी खुजली शांत नही हुई .... मेरे मन करने
 पर भी तुमने मुझे पढ़ ही लिया ... और अब शेख चिल्ली की
तरह गर्व महसूस कर रहे हो , मूर्ख !!! ... खैर अब जो भी
 है ! ...बस एक विनती है.. तुम्हे  जो करना था तुमने किया
पर किसी भले मानुष को मुझे पढने के लिए प्रेरित मत करना |

तुम नही सुधारोगे ... मुझे आभास हो रहा है की  तुम्हारा शैतानी
 दिमाग क्या सोच रह है |
बाप रे !  भगवान् बचाए ऐसे लोगों से !!!!

PS : अब ये भी पढोगे क्या !!!!!